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गन्ने की खेती:-भारत में गन्ने की खेती की पूरी जानकरी । sugarcane farming guide in hindi

 गन्ने की खेती:-भारत में गन्ने की खेती की पूरी जानकरी 

भारत गन्ने की खेती में अन्य देशों से भी ज्यादा अग्रणी देश है। यहाँ पर अधिक मात्रा में गन्ने की खेती की जाती है। इसकी खेती करके अच्छा लाभ कमा सकते है
गन्ने उत्पादन हेतु विश्व में प्रथम स्थान ब्राजील का है। तथा द्वितीय स्थान पर भारत आता है। भारत में कई स्थानों पर गन्ने की उपज की जाती है। जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि उसी के साथ   गन्ने की खेती भारत में विशेष प्रशिक्षण कार्य किए जा रहे हैं।

तथा  गन्ने की खेती के निर्यात के लिए भारत एक प्रमुख और बहुत बड़ा देश है ।गन्ने की खेती मैं विशेष चरण के द्वारा आपको महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जाएगी कृपया लेख के अंत तक बने रहे।

गन्ने की खेती 

गन्ने की खेती  हेतु भारत निर्यातक देशों की श्रेणी में आता है। गन्ने की खेती हेतु सरकार ने उचित प्रबंधन किए हैं। जिसमें बहुत सारे अनुसंधान क्षेत्र तथा प्रशिक्षण केंद्र खुलवाए गए हैं। जिसकी सहायता से कृषकों व किसानों की समस्याओं को दूर किया जाता है।

इसकी सहायता से बहुत सी जानकारी निशुल्क प्रदान की जाती है ।  गन्ने की खेती से भारत को बहुत अच्छी मात्रा में आय प्राप्त होती है। अतः आय स्रोत बहुत ही अच्छा है।
  गन्ने की खेती में बहुत से भागों का प्रयोग औषधि हेतु किया जाता है। जिसमें गन्ने के डंठल,गन्ने की पत्ती ,गन्ने का रस इत्यादि सम्मिलित है। जिसके प्रयोग से बहुत सी बीमारियों को उपचारित किया जा सकता है।

गन्ने की खेती करने से फायदा यह भी है कि इसमें नुकसान की संभावना नहीं होती। तथा उपज क्षमता भी बहुत ज्यादा होती है ।बाजार, मंडी इत्यादि में इसे बेचने में समय नहीं लगता। इसी के साथ-साथ इसका प्रयोग भी अत्यधिक मात्रा में किया जाता है। अतः गन्ने की खेती सभी के लिए लाभदायक है।
  गन्ने की खेती से जुड़े कुछ संबंधित तथ्य आपके लिए इस लेख में लाए गए हैं। आगे भी पढ़ें।

गन्ने की खेती खेती कैसे करें

गन्ने की खेती हेतु निम्न चरणों का वर्णन किया गया है।

·  गन्ने की खेती में खेत की तैयारी

  गन्ने की खेती में सर्वप्रथम महत्वपूर्ण खेत की तैयारी है। सर्वप्रथम खेत की तैयारी हेतु खेत को दो से तीन बार जुताई करवा कर मिट्टी को समतल करवाना होता है।
मिट्टी को समतल करवाने के पश्चात हमें घन जीवामृत द्वारा संशोधन करना पड़ता है।


उसमें गोबर की खाद का छिड़काव आवश्यकतानुसार किया जाना चाहिए। हम चाहे तो बाजार द्वारा संश्लेषित उर्वरकों का प्रयोग भी फसल में कर सकते हैं।
जोताई से पूर्व अगर खेत में पानी की कमी है तो सर्वप्रथम पलेवा आवश्यक होता है। उसके पश्चात ही खेत में जुताई का कार्य करना होता है।

·  गन्ने की खेती में जलवायु एवं मिट्टी

 गन्ने की खेती हुई में जलवायु एवं मिट्टी का प्रमुख स्थान है। गन्ने की खेती हेतु गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है ।मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच में होना चाहिए।
 गन्ने की खेती हेतु गन्ने के पौधों में जो फल आते हैं। उनमें गांठों को नाइट्रोजन वातावरण से भी प्राप्त होती है। अतः हमें पोटाश और नाइट्रोजन का छिड़काव कम मात्रा में करना चाहिए इसी के साथ साथ गन्ने की खेती हेतु अच्छे तापमान की आवश्यकता होती है ।


अतः 25 डिग्री सेंटीग्रेड से कम तापमान पर गन्ने की खेती करना उपयुक्त नहीं है ।इससे अधिक तापमान पर ही गन्ने की खेती की जाए तो अच्छा होता है।सूखी चिकनी एवं बलुई मिट्टी गन्ने की खेती हेतु अधिक उपयुक्त मानी गई है।

·  गन्ने की खेती में जल की व्यवस्था

 गन्ने की खेती में जल की व्यवस्था उचित प्रकार से की जानी चाहिए। नालियों के द्वारा हम जल निकासी की व्यवस्था कर सकते हैं। या फव्वारे विधि द्वारा भी गन्ने की सिंचाई में लाभप्रद उत्पादन प्राप्त होता है। इसके साथ-साथ पाइप की व्यवस्था भी की जा सकती है।


पानी के साथ-साथ हमें पोटाश की उचित मात्रा हमारी फसलों को देना होता है। जुताई के पहले सर्वप्रथम पलेवा करके हमें जुताई करवाना होता है ।
उसके पश्चात हर 21 से 22 दिन के अंतराल में हमें पानी लगाना आवश्यक होता है। क्योंकि गन्ने की खेती में गर्म जलवायु के साथ-साथ पानी की उचित व्यवस्था होना बहुत ही आवश्यक होता है।

· उर्वरक एवं कीटनाशक

आवश्यक एवं उर्वरक एवं कीटनाशक के रूप में कार्बेंडाजिम 100 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में घोल मिलाकर कि हमें बीजों का उपचार करना आवश्यक होता है।
इसी के साथ साथ उर्वरक हेतु एनपीके जिस में नाइट्रोजन की मात्रा 12 ग्राम फास्फोरस की मात्रा 32 ग्राम एवं पोटेशियम की मात्रा 16 ग्राम देकर उसका मिश्रण बनाकर हमें छिड़काव करना होता है।


इसके बाद फोटोस और फास्फोरस देने की आवश्यकता नहीं होती। गन्ने में हमें उचित प्रकार से उर्वरक एवं कीटनाशकों के छिड़काव की आवश्यकता होती है ।
हम चाहे तो जैविक विधि से तैयार किए गए उर्वरक एवं कीटनाशक का प्रयोग भी कर सकते हैं।


इसी के साथ-साथ सल्फर dg जिसकी मात्रा 3 किलोग्राम 100 लीटर पानी में घोल बनाकर 45 दिन के अंतराल में हमें छिड़काव करना चाहिए।
इसी के साथ-साथ डीएपी 75 किलोग्राम पोटाश 45 किलोग्राम एवं यूरिया 30 किलोग्राम इसका मिश्रण बनाकर हमें जोर नालियां बनाई है। उसमें छिड़काव करना चाहिए।
इसी के साथ-साथ हमें पैरों से मिट्टी को चला देना चाहिए। प्रत्येक सिंचाई में 25 किलोग्राम यूरिया हमें छिड़कना चाहिए।

· बुवाई

 गन्ने की बीच की बुवाई हेतु सर्वप्रथम हमें बीज का उपचार कार्बेंडाजिम की मदद से करना तथा उसके पश्चात हमें नीचे से दो से तीन इंच छोड़कर ऊपर का गन्ना बीज हेतु प्रयुक्त करना चाहिए।
उस गन्ने को 4 से 5 इंच नापकर कर टुकड़े कर लेना चाहिए। तथा बीज का उपचार करने के पश्चात हमें उन्हें सुखी और छायादार जगह पर सुखा लेना चाहिए।
इसके पश्चात हमारी बुवाई की विधि शुरू होती है।बुवाई हेतु पूर्व से पश्चिम की दिशा उपयुक्त मानी गई है।
सर्वप्रथम हमें 1 फुट चौड़ी नाली जो कि 25 से 30 सेंटीमीटर गहरी होती है, लेना है ऐसी ही नालियों की मदद से हम बीजों की बुवाई करेंगे। दो नाली की दूरी 4 फीट होगी तथा उसमें लगभग 25 सेंटीमीटर का गन्ना बोना है।
ट्रेंच के साथ में गुड़ाई की आवश्यकता होती है। उसके पश्चात हमें और नालियों में पानी डालना होता है। गन्ने से गन्ने की दूरी लगभग 4 से 5 इंच रखनी चाहिए। यह विधि बुवाई की गड्ढा विधि कहलाती है।
इस विधि के प्रयोग से उर्वरक की उर्वरा क्षमता बढ़ती है तथा यह फास्फोरस की 35 से 40% कमी को पूरा करती है। इसमें लागत ज्यादा आती है। परंतु उत्पादन क्षमता हमें दोगुनी प्राप्त होती है।
इस विधि के प्रयोग से लगभग 600 से 800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर कर सकते हैं।बुवाई हेतु सबसे महत्वपूर्ण विषय वस्तु यह है कि हमें बीजों की बुवाई बैठकर करना उचित होता है।


· गन्ने की प्रमुख नस्लें

यहां करो कि कुछ नस्लों के विषय में जानकारी दी जा रही है ।जिसमें शीघ्र पकने वाली मध्यम समय में पकने वाली तथा बहुत ज्यादा समय में पकने वाली फसलों के विषय में बताया जा रहा है।शीघ्र पकने वाली फसलेंकोसा 8436
गंगा नर्सरी 3220
कोसा 8436
को पंत 3220
को सा 02380
को सा 239
यह सभी नस्लें गन्ने की शीघ्र पकने वाली नस्लें हैं तथा इनकी जाओ क्षमता 800 से 1200 प्रति हेक्टेयर की दर से होती है।मध्यम देर से पकने वाली नस्लेंको पंत 97222
को पंत 99214
कोसा 8432
कोसा 767
यह सभी गन्ने की नस्लें मध्यम व देर से पकने वाली नस्लें हैं। तथा जिन की उपज क्षमता 800 से 1200 प्रति हेक्टेयर होती है।
यह गन्ने की प्रमुख नस्लें हैं जिनका उत्पादन भारत में प्रमुखता किया जाता है।तथा इनकी उत्पादन क्षमता भी सर्वश्रेष्ठ है। जो अच्छी मात्रा में गन्ने की फसलें प्रदान करती है। गन्ने की खेती से जुड़े कुछ आवश्यक चरण
· गन्ने की खेती हेतु सर्वप्रथम खेत का चुनाव उचित करना होता है।
· गन्ने की खेती हेतु गड्ढा विधि उपयुक्त है यह महंगी होती है। परंतु उत्पादन क्षमता दोगुनी होती है।
· गन्ने की खेती हेतु एक आंख के बीच का चुनाव उचित होता है।
· सर्वप्रथम खेतों में गोबर से बनी खाद घन जीवामृत का छिड़काव आवश्यक है।
·   गन्ने की खेती हेतु भारत देश में बहुत से राज्य कार्यरत है। क्योंकि भारत विश्व का दूसरा बड़ा देश है। जहां गन्ने का उत्पादन भारी मात्रा में किया जाता है। अतः इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु सरकारी प्रयास भी अत्यधिक मात्रा में होते हैं।
· गन्ने के द्वारा शक्कर गुड़ इत्यादि हमें प्राप्त होते हैं। इसकी विधि आपके साथ साझा आने वाले टॉपिको में जरूर करेंगे।
· गन्ने की सहायता से पीलिया जैसे लोगों पर अंकुश प्राप्त किया जा सकता है। गन्ने का रस पीने से हमारे शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा में वृद्धि होती है।
· यह हमारे अंदर पानी की मात्रा को संतुलित करता है ।अतः गर्मियों में गन्ने का रस पीना लाभदायक माना गया हैm
· गन्ना विशेष प्रकार की औषधि निर्माण हेतु प्रयुक्त होता है।
·   गन्ने की खेती हेतु आवश्यक अनुसंधान व प्रशिक्षण केंद्र कार्यरत हैं। अगर हम प्रशिक्षण लेना चाहते हैं तो उन प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण ग्रहण कर सकते हैं।


 गन्ने की खेती में आने वाली समस्याएं

· खेत की समस्या

सर्वप्रथम खेत की समस्या मिट्टी के चुनाव से संबंधित होती है मिट्टी का पीएच मान अत्यधिक मात्रा में फसलों को प्रभावित करता है।
खेत का चुनाव हमें मिट्टी को ध्यान में रखकर करना चाहिए। अन्यथा हमारी फसल प्रभावित हो सकती है। यदि खेत में मिट्टी का पीएच मान सामान्य नहीं है तो सर्वप्रथम हमें उचित और वर्गों के प्रयोग से मिट्टी का पीएच मान संतुलित करना होगा। इसी के पश्चात में गन्ने की खेती करना प्रारंभ करना होगा।

· मानसिकता

 गन्ने की खेती हेतु हमें अपने ही खेत में छोटे-छोटे प्रशिक्षण करते रहना चाहिए। इसकी सहायता से हमें अच्छी जानकारी प्राप्त होती रहेगी तथा सर्वप्रथम हमें यह मानसिकता बनानी होगी। कि  गन्ने की खेती से भी अधिक मात्रा में उपज तथा आय प्राप्त की जा सकती है। अतः इस कार्य हेतु हमें अग्रणी होना होगा।

· प्रशिक्षण की कमी

प्रशिक्षण की कमी भी  गन्ने की खेती से संबंधित महत्वपूर्ण समस्या है। सभी को  गन्ने की खेती से संबंधित उचित प्रकार की जानकारी प्राप्त नहीं होती। जिससे उन्हें समस्या उत्पन्न होती है। अतः हमारे राज्य में छोटे-छोटे प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। जिनकी सहायता से हम प्रशिक्षण प्राप्त कर गन्ने की खेती कर सकते हैं।

· पानी की समस्या

 गन्ने की खेती हेतु पानी की समस्या भी उत्पन्न होती है। गन्ने की खेती में अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है ।अतः फब्बारे विधि से कम मात्रा में उन्हें अच्छे से सिंचित कर सकते हैं। हमें हमारे खेतों में फब्बारे विधि से सिंचाई की विधि अपनाना चाहिए।

· लागत की कमी

सभी किसानों के पास उचित मात्रा में लागत में नहीं होती। इसलिए सरकार ने किसानों को सब्सिडी देना भी प्रारंभ कर दिया है। जिसके द्वारा हम चाहे तो अपनी खेती प्रारंभ करने हेतु सरकार से सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। इसे हेतु हमें फॉर्म भर कर भेजना होता है।जिसकी पूरी विधि हम आपको आने वाले टॉपिको में जरूर बताएंगे।


अंत में 

आज के इस टॉपिक में गन्ने से संबंधित जानकारी आपको प्रदान की गई। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा जरूर बताएं। तथा खेती-बाड़ी से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए हमारी साइट पर विजिट करते रहें।
यदि पशुपालन और खेतीबाड़ी से संबंधित आपको किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करना है तो हमें आप अपने विचार कमेंट बॉक्स पर कमेंट करके साझा कर सकते हैं।
आने वाले टॉपिक पर हम गन्ने में लगने वाले रोग तथा उससे रोकथाम हेतु जानकारी देंगे। उसे संबंधित जानकारी हेतु आप साइट पर विजिट जरूर करें।

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