Homefarming guideसिरोही बकरी पहचान,कीमत,वजन की पूरी जानकारी।Sirohi goat farming guide in hindi

सिरोही बकरी पहचान,कीमत,वजन की पूरी जानकारी।Sirohi goat farming guide in hindi

सिरोही बकरी पहचान,कीमत,वजन की पूरी जानकारी 

सिरोही बकरी का भारत में पाई जाने वाली सभी नस्ल की बकरियों में एक अपना स्थान है।सिरोही बकरी एक मध्यम आकार की बकरी है जिसका पालन मांस एवं दूध उत्पादन के लिए किया जाता है। सिरोही बकरी का नाम राजस्थान के सिरोही जिले के नाम पर पड़ा है।

सिरोही नस्ल की बकरियां ज्यादातर राजस्थान के सिरोही जिले में पाई जाती हैं तथा सिरोही जिले से लगे हुए कुछ जिले जैसे नागौर, सीकर, अजमेर, टोंक, उदयपुर, भीलवाड़ा इन जिलों में भी सिरोही नस्ल की बकरी का पालन किया जा रहा है । 
राजस्थान राज्य के साथ-साथ यह इससे लगे हुए राज्यों में भी पाई जाती है जैसे गुजरात उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश और हरियाणा। यह बकरी राजस्थान में मुख्यता अरावली पर्वत श्रंखला के आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। 18 वीं lievstock census के हिसाब से इस नस्ल की बकरियां कर्नाटक और केरल राज्य में भी पाई गई हैं।

सिरोही बकरी को कैसे पहचाने?

सिरोही नस्ल की बकरी का आता है मुख्यतः  मध्यम एवं बड़े आकार के साथ-साथ बेलनाकार से शंकुनुमा आकार का होता है और यह माना जाता है कि जो जानवर शंकुनुमा आकार के होते हैं वह बेहतर मांस उत्पादन के लिए माने जाते हैं।

सिरोही नस्ल की बकरी एवं बकरे परिपक्व होने पर इनके गर्दन में घूम आओ एवं पीठ में हल्का दबाव आ जाता है।

सिरोही नस्ल की बकरियां एवं बकरे डार्क ब्राउन तथा लाइट ब्राउन रंग के साथ साथ डार्क ब्राउन कथा लाइट ब्राउन धब्बों में पाई जाती है। कुछ ही ऐसे जानवर होते हैं जो पूरी तरह से एक ही रंग में पाए जाते हैं इनके शरीर में छोटे-छोटे एवं घने बाल पाए जाते हैं जो काफी चमकीले होते हैं।

सिरोही बकरी के कानों की लंबाई मध्यम तथा चपटे नीचे की ओर लटके हुए पत्तानुमा आकार के होते है ।

सिरोही नस्ल के बकरों एवम् बकरियों दोनों में सींघ पाए जाते है जो पीछे की ओर मुड़े हुए होते है इसके पूछ की लंबाई मध्यम और छोटी होती है जो पीछे से ऊपर की ओर मुड़ी हुई होती है


सिरोही बकरी पालन

दोस्तों अभी हमने सिरोही बकरी की कुछ विशेषताओं के बारे में जाना कि कैसे वह कहां पाई जाती है उसकी पहचान रंग तथा मांस और दूध उत्पादन क्षमता के बारे में अब हम बात करने वाले हैं कि अगर हम सिरोही नस्ल की बकरी से अपना बकरी फार्म शुरू करना चाहते हैं तो किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

जैसा कि आपको बकरी पालन में अनुभव कितना है आपने कहीं से प्रशिक्षण लिया है या नहीं आपके यहां का वातावरण कैसा है तथा आपके यहां पर खाने और पीने की क्या क्या व्यवस्था है तथा साथ ही साथ आपको इस बारे में भी पता होना चाहिए कि आपके यहां पर नजदीकी बकरी मार्केट मंडी कहां है और वहां पर इस नस्ल की बकरियों का क्या मूल्य मिलता है

सिरोही बकरी पालन करने से पहले आपको विशेष तौर पर इस बात का ध्यान देना है कि आप इस नस्ल की बकरी को किस तरीके से पालन करना चाहते हैं।जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बकरी पालन में मुख्यतः तीन प्रकार है जिसमें किसान भाई बकरियों को पालते हैं

1विचरण पद्धति

2 अर्ध साधन पद्धति

3 सघन पद्धति

विचरण पद्धति क्या है?

विचरण  पद्धति बकरी पालन के ऐसी पद्धति है जिसमें बकरियां पूर्णता चराई पर निर्भर रहते हैं। इस पद्धति में किसी विशेष बाड़े(फार्म) की आवश्यकता नहीं होती है। बकरियां सुबह से शाम तक चरने  के लिए मैदानी क्षेत्र, पास के जंगल में ले जाया जाता है। जहां पर बकरियां पेड़ों की पत्तियां घास से ही अपना पेट भरती  हैं।

शाम को चरा के लेन के बाद किसान /बकरी पालक घर के पास एक बाड़ा बनाकर या घर पर ही एक स्थान पर रखते हैं।विचरण पद्धति का उपयोग ज्यादातर भूमिहीन किसान,खेतिहर मजदूर या किसानों के द्वारा किया जाता है। जहां पर विचरण करने की पर्याप्त जगह होती है। विभिन्न राज्यों में पाए जाने वाले किसानों और मजदूरों के द्वारा इस पद्धति का उपयोग वहां पर पाई जाने वाली स्थानीय नस्लों की बकरियों का पालन करने में किया जाता है।

सिरोही बकरी राजस्थान राज्य में पाई जाती है। और वहां पर रह रहे किसानों के द्वारा भी सिरोही बकरी का पालन विचरण पद्धति के द्वारा किया जाता है।

अर्ध विचरण/अर्ध सघन  पद्धति क्या है ?

अर्थ सघन पद्धति में बकरियों का पालन इस तरीके से किया जाता है जिसमें उन्हें कुछ समय के लिए बाहर चराने के लिए छोड़ा जाता है तथा फिर कुछ समय के लिए बकरियों को घर में ही खाने की भरपूर व्यवस्था की जाती है।

इस पद्धति ने कुछ किसान कुछ बाहर की नस्लों की बकरियां लाकर अपने यहां पर व्यवस्थित फॉर्म बनाकर इनका पालन करते हैं।विचरण पद्धति की तुलना में बकरियों की देखरेख बहुत अच्छे से की जा सकती है तथा समय-समय पर पड़ने वाली आवश्यकता को  आसानी से पूरा किया जा सकता है। जैसे टीकाकरण, बकरियों के स्वास्थ्य का परीक्षण इत्यादि।

इस पद्धति की विशेष बात यह है कि इसमें किसानों की जो लागत है वह कम लगती है और हम सघन पद्धति की तुलना पर कम खर्च पर बकरियों का पालन आसानी से कर सकते हैं। तथा जहां पर बकरियों को चराने की पर्याप्त जगह नहीं होती है वहां पर इस पद्धति को अपनाकर बकरियों का पालन किया जाता है।

इसमें किसानों का बकरियों के खाने पीने में होने वाला खर्च कम हो जाता है जिससे उन पर बकरी पालन का भार कम पड़ता है।

सघन पद्धति क्या है?

व्यवसायिक स्तर पर बकरी पालन करने के लिए सघन पद्धति का पालन किया जाता है। सघन पद्धति में एक व्यवस्थित बाड़ा (फार्म) बनाकर बकरियों को एक ही जगह पर रहने और खाने की व्यवस्था की जाती है। बकरी पालन में यह पद्धति सबसे सफल पद्धति है। इसमें बकरियों का शारीरिक विकास बहुत जल्दी से होता है क्योंकि बकरियों के लिए समय समय पर खाने की और पीने की व्यवस्था की जाती है।

इसमें हम बकरियों की देखरेख विचरण पद्धति तथा अर्ध सघन पद्धति की तुलना में आसानी से कर सकते हैं। इस  पद्धति में आप बकरियों, बकरियों के बच्चे, बकरे, ब्रीडर बकरे को आवश्यकतानुसार खाने और पीने को व्यवस्थित रूप से उपलब्ध करा सकते हैं तथा उनको आप अपने हिसाब से तैयार कर सकते हैं।

सिरोही बकरी फार्म

किसान भाइयों सिरोही बकरी फॉर्म बोलने से पहले मैं आपको बताना चाहता हूं कि आप अपने यहां पर इसके बारे में सिरोही बकरी का मार्केट उसकी डिमांड के बारे में आवश्यक जानकारी जरूर जुटा लें। ताकि जब कभी भी आपके फार्म  पर बकरियां तैयार हो तो उन्हें बेचने में ज्यादा परेशानी ना हो।

अक्सर किसान भाई बकरी फार्म खोलने से पहले यही गलती करते हैं कि उनको अपने आसपास के क्षेत्र में पाए जाने वाले बकरी मार्केट (मंडी) के बारे में पता नहीं होता है। और फिर जब बकरियां तैयार होती हैं तो उन्हें बेचने के लिए किसी दूसरी जगह का रुख करना पड़ता है जिसकी वजह से बकरियों को लाने ले जाने का खर्चा बढ़ जाता है इसलिए आप सभी किसान भाई इस बात का ध्यान रखते हुए सिरोही बकरी का चयन करें।

सिरोही बकरी फार्म खोलने से पहले आप अपने इलाके में अगर किसी भी किसान के द्वारा सिरोही बकरी का पालन किया जा रहा है तो वहां विजिट जरूर करें क्योंकि सिरोही बकरी जैसा हमने इसके गुणों के बारे में जाना कि आसानी से किसी ही वातावरण में ढल जाती है और इसका शारीरिक विकास दूसरी बकरियों की तुलना पर बहुत जल्दी होता है।

फार्म  विजिट कर उनसे मिलकर इसके बारे में पूरी जानकारी फार्म  मैनेजमेंट के बारे में जानकारी तथा सिरोही बकरी के मार्केट के बारे में अधिक से अधिक जानकारी इकट्ठा जरूर करें।

सिरोही बकरी फार्म राजस्थान

भारत सरकार के सर्वेक्षण के अनुसार राजस्थान राज्य में सबसे ज्यादा बकरियां पाई जाती हैं। यहां पर सिरोही, जखराना, मारवाड़ी यह ऐसी नस्ल है जो भारत सरकार के द्वारा बकरियों की पंजीकृत 24 बकरियों की नस्लों  में से हैं और राजस्थान राज्य में पाई जाती हैं।

साथ ही साथ कुछ अन्य नस्लें भी हैं जो स्थानीय रूप से जिनका पालन वहां के किसानों के द्वारा किया जाता है जैसे नागोरी, गुजरी, सोजत, बीटल इत्यादि।

मैं आप लोगों को बताना चाहूंगा कि जब मैंने राजस्थान विजिट किया और वहां के कुछ बकरी पलकों से मिला तथा उनके बकरी पालन अनुभव के बारे में जानने की कोशिश की तो मुझे पता चला कि वहां पर ज्यादातर किसान के राजस्थान राज्य के  सिरोही, नागौर, अजमेर, किशनगढ़ ब्यावर इन जिलों से आते हैं वह सिरोही, गुजरी, अजमेरी, सोजत नस्ल की बकरी के साथ अपना बकरी फार्म चला रहे हैं। निम्नलिखित कुछ बकरी फार्म  के वीडियोस मैंने शेयर किए हैं इन्हें देखकर आप काफी जानकारी जुटा सकते हैं।

इसके बाद मैंने उनसे बकरियों को दिए जाने वाले फीड /खाने के बारे में जानकारी जुटाई कि उनके यहां बकरियों की दैनिक दिनचर्या क्या होती है? वे सबसे पहले क्या करते हैं?क्या-क्या चीज हमें खाने और पीने में देते हैं तो मुझे पता चला कि :-

· सुबह 8:00 बजे सबसे पहले विश सूखी घास जिसमें वे ग्वार का भूसा, राहर की फली, लॉन्ग की पत्ती जिसे हम खेजड़ी के पेड़ के नाम से जानते हैं यह खाने के लिए देते हैं।

· फिर 10:00 से 11:00 पानी देते हैं जिसमें वह पानी के साथ और भी कई चीजें दाने के रूप में देते हैं जिससे बकरियां पानी को बड़े चाव से पीती हैं तथा पानी में भीगा हुआ दाना बड़े चाव से खाती हैं और भींगे  हुए दाने को खाने से नुकसान भी नहीं होता है।

· फिर भी दोपहर 12:00 बजे तक हरी पत्तियां जिसमें नीम ,खेजड़ी, बबूल, देसी बबूल आदि पेड़ों की हरी पत्तियां खिलाते हैं।

· इसके बाद वे शाम 4:00 से 5:00 के बीच फिर से दोबारा सूखी घास के रूप में बकरियों को ग्वार का भूसा, चने का भूसा, राहर का भूसा, लोंग पत्ती यह सब देते हैं।

सिरोही बकरी में बच्चे देने की छमता 

सामान्यता सिरोही बकरी 14 से 16 महीने में दो बार बच्चा देती है और बच्चा देने की जो क्षमता है वह 60 परसेंट दो बच्चे तथा 35 से 38 परसेंट एक बच्चा तथा 2  से 3  परसेंट तीन बच्चे को जन्म देती है। सिरोही बकरी बहुत जल्दी परिपक्व हो जाती है और यह 18 से 20 महीने की उम्र में ही बच्चा देने के लिए तैयार हो जाती है और जन्म के समय इससे जो मिलने वाले बच्चे हैं उनका जो वजन है वह 2  से 3 किलोग्राम के बीच का हो सकता है

सिरोही नस्ल की बकरी से अच्छे बच्चे जो कि काफी स्वस्थ हो और पैदा होते समय है काफी तंदुरुस्त हो यह उसकी मां के ऊपर और उसके पिता के ऊपर निर्भर करता है इसलिए हमें इस बात का विशेष तौर पर ध्यान देना चाहिए की जब हम बकरी को क्रॉस करा रहे हैं उस समय उसकी शारीरिक स्थिति कैसी है तथा हमें प्रजनक (ब्रीडर) की आयु तथा उसके स्वास्थ्य के बारे में भी बारीकी से पता होना चाहिए। जैसे हमें किसी भी बकरी से अगर अच्छे बच्चे प्राप्त करना है तो हमारा ब्रीडर्स बकरी से कम से कम 6 माह से 1 साल का उम्र में बड़ा होना चाहिए तथा उसका पूर्णता शारीरिक विकास हो गया जिससे उसमें शुक्राणुओं की संख्या पर्याप्त मात्रा में मिल सके।

साथ ही साथ हमें इस बात का भी ध्यान देना है की हमारी बकरी हीट पर कब आ रही है और उसके मद चक्र के बारे में भी हमें पता होना चाहिए जिससे हम समय पर बकरी को क्रॉस करा सकें

ब्रीडर का चयन करते समय आपको इस बात का विशेष तौर पर ध्यान देना है कि वह प्योर नस्ल का होना चाहिए उसके जो गुण हैं वह प्योर नस्ल के बकरों के हिसाब से होने चाहिए तथा उसकी जो उम्र है वह ज्यादा ना हो कहा जाए तो 6 से 8 दांत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। जिससे जो हमारे यहां पर बकरी से होने वाले बच्चे हैं वह प्योर होंगे साथ ही साथ स्वस्थ होंगे।

सिरोही बकरी की कीमत

सिरोही बकरी की कीमत उसके वजन और उसके आकार के ऊपर के ऊपर निर्भर करती है।तथा इसके ऊपर निर्भर करता है कि आपके आसपास के क्षेत्र में सिरोही बकरी की उपलब्धता कैसी है। उदाहरण के तौर पर यदि आप राजस्थान के किसी फॉर्म पर जाते हैं तो वहां पर आपको इस नस्ल की बकरी की कीमत कम मिलेगी अगर हम इसे अपने यहां के मार्केट से तुलना करें और यदि आप राजस्थान के किसी लोकल मार्केट से पता करें तो वहां पर भी इस नस्ल की बकरी की कीमत हमारे यहां के मार्केट से कम मिलेगी।

यदि आप व्यवसायिक स्तर पर बकरी पालन करने की सोच रहे हैं और सिरोही बकरी के साथ अपना फार्म  शुरू करना चाहते हैं तो  सिरोही बकरी की जो कीमत है 350 फीमेल तथा 400 पर केजी मेल के हिसाब से मिल जाएगी। यह कीमत वैक्सीनेटेड बकरियों की है तो जब कभी भी आप खरीदें तो इस बात का विशेष तौर पर ध्यान दें कि बकरियों का टीकाकरण पूरी तरीके से किया गया हो।

सिरोही बकरी का वजन ( sirohi goat weight chart)

सिरोही बकरी की उम्र  सिरोही बकरा  सिरोही बकरी
पैदा होने पर (पहले हफ्ते)

3 -4  माह

7 -8  माह 

10 -12 माह 

12 -14  माह 

14-16  माह 
2-3 kg

18-20 kg

18-20 kg

24-28 kg

40-45 kg

45-50 kg
2-3 kg

18-20kg

22-26 kg

28-30 kg

30-35 kg

35-40 kg
Sirohi goat sizeSirohi male(buck)Sirohi female(doe)
Body weight (kg)3230
Body length(cm)6765
Chest girth (cm)7271

सिरोही बकरी फार्म खोलने से पहले जाने कुछ मुख्य बातें 

1. यदि आप गर्म और शुष्क वातावरण वाले क्षेत्र से आते हैं तो आप प्योर सिरोही बकरी के साथ जा सकते हैं और यदि आप ठंडे प्रदेश से आते हैं जैसा कि बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तो आप कोशिश करें कि 70 परसेंट क्रॉस सिरोही बकरी के साथ अपना फॉर्म शुरू करें जिससे आपके यहां पर मृत्यु दर कम हो और उन बकरियों से मिलने वाले बच्चे आपके यहां के वातावरण में आसानी से ढल सकें।

2. सिरोही नस्ल की बकरी को स्टॉल फीडिंग सिस्टम पर आसानी से डाला जा सकता है ।इस नस्ल की बकरी का पालन करने का सबसे अच्छा फायदा यह है कि यदि आपके पास पर्याप्त मात्रा में चराने के लिए जगह नहीं है तो आप इसे आराम से अपने काम पर ही पूर्णता स्टॉल फीडिंग सिस्टम पर पाल सकते हैं।

3. सिरोही नस्ल की बकरी एवं बकरे कम उम्र में ही परिपक्व हो जाते हैं इसलिए जब कभी भी आप सिरोही नस्ल  की बकरियों के साथ अपना फार्म  शुरू करें तो इनके खाने पीने की व्यवस्था बहुत अच्छे से करें ताकि यह कम से कम समय में अच्छे से अच्छा वजन बना सकें।

4 · सिरोही नस्ल की बकरी मुख्यता गर्म प्रदेश में पाई जाने वाली नस्ल है इसका चयन करते समय आपको आपके इलाके में कैसा वातावरण रहता है इसका पूरा ज्ञान होना चाहिए।

5 · अगर आपके इलाके में सिरोही नस्ल की बकरी नहीं पाई जाती है और आप सिरोही नस्ल की बकरी के साथ अपना बकरी फार्म शुरू करना चाहते हैं तो आपको बकरी पालन ट्रेनिंग लेना बहुत जरूरी हो जाता है इसलिए बकरी पालन ट्रेनिंग जरूर लें और आने वाले खर्चे से अपने आप को बचाएं।

6 · इसलिए आप किसी भी सर्टिफाइड शासकीय एवं प्राइवेट संस्थान से बकरी पालन ट्रेनिंग जरूर लें।

7 · सिरोही बकरी मुक्ता मांस उत्पादन के लिए पाली जाती है क्योंकि इसका शारीरिक विकास दूसरी नस्ल की बकरियों की तुलना में कम समय बहुत अधिक होता है इसलिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में हरी घास सूखी घास की व्यवस्था होनी चाहिए।

8 · आपको सिरोही नस्ल की बकरी के मार्केट रिसर्च के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।

9 · प्योर नस्ल की बकरी का चयन करना चाहिए जिससे उससे उत्पन्न होने वाले बच्चे भी प्योर हो उनका भी शारीरिक विकास बहुत जल्दी हो जिससे हम अपने बकरी फॉर्म को जल्द से जल्द मुनाफे में तब्दील कर सकें।

10 · सही उम्र की बकरियों के साथ अपना बकरी काम शुरू करना चाहिए।

11 · सही उम्र के प्रजनन ब्रीडर बकरे का चयन करना चाहिए।

12 · बकरियों की सही उम्र में ही उनको क्रॉस कर आना चाहिए ताकि मां और बच्चे दोनों स्वस्थ पैदा हो। 

अंत में

आज के इस टॉपिक में हमने सिरोही बकरी के बारे में जाना की सिरोही बकरी की पहचान क्या होती है,इसको पालने के फायदे,क्या कीमत होती है,कितने बच्चे देती है तथा सिरोही बकरी फार्म खोलने से पहले आपको किन किन बातों का विशेष तौर पर ख़याल रखना चाइये।आपको यह जानकरी कैसी लगी हमे कमेंट करके जरूर बताये।

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