Homefarming guideमुर्गी पालन की पूरी जानकारी।Poultry farming guide in hi

मुर्गी पालन की पूरी जानकारी।Poultry farming guide in hi

ब्रायलर फार्मिंग

ब्रायलर फार्मिंग अर्थात मांस हेतु मुर्गी पालन आज एक सुविकसित व्यवसाय का रूप ले चुका है और इसमें अभी अपार संभावनाएं हैं।ब्रायलर फार्मिंग कम समय और लागत में अधिक मुनाफा प्रदाय करने वाला व्यवसाय है। इसलिए ब्राउज़र पालन काफी तेजी से उभर रहा है।

ब्रायलर पालन से संबंधित जानकारी :-

1.       स्थान का चयन:

1.       जगह समतल हो और कुछ उचाई पर हो जिससे कि बारिश का पानी ना भरे।
2.       मुख्य सड़क से ज्यादा दूर ना हो।
3.       बिजली व पानी आसानी से उपलब्ध हो।
4.       चूजा, दाना, दवाइयां आदि आसानी से उपलब्ध हो वह तैयार माल बेचने के लिए बाजार भी हो।

2.       शेड का निर्माण:

1.       शेड का निर्माण पूर्व पश्चिम दिशा में होना चाहिए अर्थात शेड के जाली वाली साइड उत्तर दक्षिण में होना चाहिए।
2.       शेड की चौड़ाई 25-30 फुट वा लंबाई जरूरत के अनुसार रख सकते हैं।
3.       शेड का फर्शपक्का होना चाहिए।
4.       शेड के दोनोंओर जाली वाली साइड की दीवाल फर्श से मात्र 6 इंच ऊंची होनी चाहिए।
5.       शेड की छत को सीमेंट या एस्बेस्टस की चादर से बनाना चाहिए और बीचों-बीच वेंटिलेशन के लिए जगह देना चाहिए।
6.       शेड की साइड की ऊंचाई फर्श से 8-10 फुट होना चाहिए। वह बीचो-बीच की ऊंचाई फर्श से 14 से 15 फुट होना चाहिए।
7.       बारिश के दिनों में पानी की बौछार सेड में ना आए इस हेतु सीमेंट की चादर को दोनों ओर से 3 फीट तक बाहर लगाना चाहिए।
8.       शेड के अंदर बिजली, प्रकाश, दाने व पानी के बर्तन, पानी की टंकी आदि की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
9.       लंबे शेड को निश्चित दूरी पर बराबर भागों में बांट देना चाहिए।

3.       दाने व पानी के बर्तन:

1.       प्रत्येक 100 चीजों पर कम से कम 3पानी के व 3 दानेके बर्तन होना आवश्यकहै।
2.       दाने व पानी के बर्तन मैनुअल या ऑटोमेटिक हो सकते हैं।

 4.       बुरादा या लीटर: –

बुरादा के रूप में लकड़ी का बुरादा या धान का छिलका या मूंगफली का छिलका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी 3-4 इंच मोटी परत फर्श पर बिछाना चाहिए। बुरादा नया व फंगस एवं संक्रमण रहित होना चाहिए।

5.   ब्रूडिंग:-

ब्रूडिंग चूजे के भविष्य निर्धारण मेंबहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।ब्रूडिंग का तात्पर्य है, चूजे को उचित तापमान प्रदान करना, जैसा कि मुर्गी अंडों को शेते समय देती है। ब्रूडिंग कई प्रकार से की जा सकती है :-

1.       बिजली के बल्ब द्वारा ब्रूडिंग:-

इसके लिए बिजली की बराबर सप्लाई अति आवश्यक है। सर्दी में प्रति चूजा कम से कम 2 वाट ऊर्जा की आवश्यकता होती है। गर्मी में प्रति चूजा 1 वाट ऊर्जा पर्याप्त है। बिजली के बल्ब को लकड़ी या बांस के टोकने या एलुमिनियम केब्रुडर में लगाकर पहले सप्ताह फर्श से 6 इंच ऊंचाई पर रखना चाहिए। दूसरे सप्ताह ऊंचाई बढ़ाकर 10 से 12 इंच कर देना चाहिए। सर्दियों व ठंड में ब्रूडिंग 12 से 15 दिन तक एवं गर्मी के मौसम में 4 से 5 दिन तक करना पड़तीहै।

2.   गैस ब्रूडर द्वारा ब्रुडिंग:-

क्षमता के अनुसार गैस ब्रूडर बाजार में उपलब्ध है। जैसे कि 1000 या 2000 क्षमता वाले गैस ब्रूडर।गैस ब्रूडर, ब्रूडिंग का सबसे अच्छा तरीका है। इस तरह ब्रूडिंग करने से सेठ के अंदर एक समान तापमान रहता है। 

3.       अंगीठी या सिगड़ी द्वारा ब्रूडिंग

जिन जगहों में ठंड अधिक पड़ती है या बिजली की समस्या है वहां के लिए इस तरह की ब्रूडिंग कारगर है। लेकिन सावधानी रखना बहुत जरूरी है अन्यथा शेडके अंदर धुआं भर सकता है। व सफोकेशन के कारण चूजोंकि मृत्यु हो सकती है।

6.दाना :-

 ब्रायलर पालन में 3 तरह का दाना उम्र व वजन के अनुसार दिया जाता है  1. प्री स्टार्टर     –  0  – 10  दिन तक  2. स्टार्टर       –  11  – 20  दिन तक  3. फिनिशर     –  21  –  मुर्गे बिकने तक  2 किलोग्राम वजन का एक मुर्गा लगभग 3.50 किलोग्राम दाना खाता है।

 7. पानी :-

ब्रायलर चूजा 1 किलोग्राम दाना पर 2 -3 लीटर पानी पीता है ,गर्मियों में  यह मात्रा दुगुनी हो सकती है। फिर भी एक साधारण तरह से देखें तो पानी की खपत इस तरह होती है।                  जितने सप्ताह का चूजा है उसमें 2 का गुणा कारणे पर जो मात्रा आयेगी,वह मात्रा पानी की प्रति 100 चूजों पर खपत होगी जैसे पहला सप्ताह =1 *2 =2 लीटर पानी / 100 चूजा दूसरा सप्ताह =2 *2 =4 लीटर पानी /100  चूजा 

8. जगह 

पहला सप्ताह                                      –     1 वर्गफुट / 3 चूजे 

दूसरा सप्ताह                                       –     1 वर्ग फुट /2 चूजे

तीसरे सप्ताह से 1 किलोग्राम वजन          –     1 वर्ग फुट/ एक चूजा
1 किलोग्राम से डेढ़ किलोग्राम वजन तक   –    1.25 वर्गफुट/ एक चूजा
1.5 किलोग्राम से बिकने                          –     1.5 वर्गफूट/ 1 चुजा

 उचित जगह उपलब्ध कराने से चूजों की बढ़त अच्छी होती है। वह कई बीमारियों से बचाव भी होता है।

 9 .  लाइट 

चूजों को 23 घंटे प्रकाश देना चाहिए। व 1 घंटे का गेप रखना चाहिए। ताकि चुजे अंधकार होने पर भी डरे नहीं। पहले व दूसरे सप्ताह अधिक तीव्रता का प्रकाश देना चाहिए। एवं उसके बाद प्रकाश की तीव्रता कम करते जाना चाहिए।

ब्रॉयलर चूजों को पालने संबंधी जानकारी

1.       चूज़े आनेके साथ 8 दिन पहले फार्म व शेड की साफ सफाई कर ले, उसको धोकर चुने से पोर्ट करवा कच्चे-फर्श की लिपाई करके छोड़ दे। बाद में फर्श को भी चुने से पोतें।
2.        खाली शेड के अंदर और बाहर 3% फार्मलीन का छिड़काव को पूरी तरह से पहले कर ले आने तथा दोनों ओर के पदों से शेर को पूरी तरह से ढक दें।
3.       बुरादा सूखा तथा नया होना चाहिए। चूजे आने की 2 दिन पहले फर्श पर लकड़ी के बुरादे या घन के छिलके की टीम 4 इंच मोटी परत बिछाए।
4.        चूज़े आने के 24 घंटे पहले बुरादे के ऊपर अखबार या पेपर की दो परत बिछाए।
6.       चूजे आने के 24 घंटे पहले दोनों और के पर्दों को गिराकर शेड को पूरी तरह बंद कर दें। एवं शेड के अंदर बल्ब ब्रूडर को चालू कर । जिससे शेड का तापमान चीजों के अनुकूल 75 डिग्री फारेनहाइट हो जाए।
7.        चूज़े आने के कुछ घंटे 3ए4 घंटे पहले पानी के बर्तनों में पानी भरकर ब्रूडर बल्ब के टोकने के पास रखें।
8.        चूज़े आते ही उन्हें chicsboxसे बाहर निकालकर इलेक्ट्रॉल पाउडर एवं पोटेशियम क्लोराइड मिला पानी पिलाकर शेड के अंदर छोड़ते जाएं ऐसा। करने से चीजों को ताकत भी मिलेगी वह उनकी गिनती भी हो जाएगी।
9.        चूजों को बहुत देर तक सिक्स बॉक्स के अंदर ना रहने दें ।अन्यथा डिहाइड्रेशन से उनकी मृत्यु हो । चीजों को चार-पांच घंटे तक केवल पानी पीने ।
10.    पानी पीने के बाद मक्के या दलिया पेपर के ऊपर डालें। और दाने के बर्तनों में भरकर रखें एवं छह से 8 घंटे तक केवल मक्के का दलिया ही खाने । उसके बाद ही रीस्टार्ट दाना चूजों को दे
11.   सर्दियां में जो कि फार्म पर डिलीवरी सुबह या दोपहर के समय कराएं रात को नहीं।
12.    छोटे व कमजोर चूजों को अन्य चूजों से अलग रखें। तथा उनके लिए अलग से दाना पानी व ब्रूडर की व्यवस्था करें। समय समय पर छोटे कमजोर व बीमार चूजों को पूरे प्लाक से छांटे।
13.   चूजों  की अच्छी बढ़त के लिए उचित दवाइयां टीकाकरण का रखरखाव उचित जगह पर दो का प्रबंधन, विपरीत मौसम से बचाव, संतुलित एवं स्वच्छ पानी देना चाहिए। सर्दियों में चूजों की अच्छी ब्रूडिंग बहुत आवश्यक है। गर्मी के मौसम में उत्पन्न तनाव को कम करने के लिए anti-stress मल्टीविटामिन एवं विटामिन सी देना चाहिए।
14.    शेर के अंदर अमोनिया निर्माण को रोकने के लिए व बुरादे को सूखा बनाए रखने के लिए बुरादे की गुड़ाई सप्ताह में दो बार अवश्य करें। तथा 1 किलोग्राम चुना 20 वर्ग फुट जगह में मिलाएं।
15.    पानी में ब्लीचिंग पाउडर 6 ग्राम प्रति 1000 लीटर पानी में या पोटेशियम परमैग्नेट 1 ग्राम प्रति 1000 लीटर पानी में मिलाएं।
16.    टीकाकरण के पहले या बाद में एंटी स्ट्रेस विटामिंस देना चाहिए समय-समय पर मुर्गों की जांच लैब में कराएं व तकनीकी विशेषज्ञ से सलाह लें।

मुर्गियों का टीकाकरण प्रकार एवं विधि

आधुनिक पोल्ट्री उद्योग की कल्पना प्रभावशाली टीकाकरण के बिना नहीं की जा सकती। मुर्गी पालन में वृद्धि हुई  पर साथ ही इनकी बीमारियों में भी वृद्धि हुई है। और इनका स्वरूप भी बदला है ।इसलिए बीमारियों से बचाव हेतु प्रभावी टीकाकरण नितांत आवश्यक ।

टीकाकरण के प्रकार   

1.       लाइव वैक्सीन (जीवित टीका) सामान्यतः इस टीके को पीने के पानी, में आंख , नाक , मुंह में बूंद के रूप में या स्प्रे विधि द्वारा दिया जाता है।

3.       किल्ड याentiactivatedवैक्सीन (मृतटीका)   पीने के पानी द्वारा बड़ी संख्या में टीकाकरण का यह सब तरीका है। पानी में वैक्सीन पिलाने की एक-दो घंटे पहले मुर्गियों को प्यासा रखना चाहिए। सारे ड्रिंक कर पाइप लाइन टैंक व पानी के चैनल साफ होना चाहिए ।एवं पानी में किसी तरह का सैनिटाइजर ब्लीचिंग पाउडर टीकाकरण के 24 घंटे पहले व 24 घंटे बाद तक नहीं मिलाना चाहिए ।

विधि

 पानी में पांच 6 ग्राम दूध पाउडर प्रति लीटर पानी के हिसाब से मिलाए ।व 10से15 मिनट बाद उसमें वैक्सीन मिलाकर मुर्गियों को । गर्मियों के मौसम में पहले पानी को ठंडा कर लें इसके लिए एक पॉलिथीन में बर्फ भरकर उसे पानी में चलाएं। जब पानी ठंडा हो जाए तो उसमें वैक्सिंग मिला दे । को सीधा पानी में ना मिलाएं पानी की मात्रा का निर्धारण करने के लिए उस दिन पक्षियों को जितना पानी लगता है उसमें 0.3 का गुणा कर दें। जो मात्र पानी की निकली उसे टीकाकरण के लिए उपयोग करें । में वैक्सीन देते समय पानी की सही मात्रा होना आवश्यक है।

 क्र.    मुर्गियों की उम्र                                  पानी की मात्रा लीटर में

                                             200 मुर्गियां      500 मुर्गियां      1000 मुर्गियां

  1.     2 से3 सप्ताह                     1.5               2.5                       5

  2.      4 से 5                              2                   5                        10

  3.      6 से 7                              3                 7.5                       15

  4.    15 से 16                           5                  10                       20

 5.    18 से 22                            5                 12.5                     25

 6.     22 से ज्यादा।                    6                  15                       30

यह ध्यान रहे कि मुर्गियां 1 घंटे के अंदर पूरा वैक्सीन वाला पानी खत्म कर दे।

2  आंख/ नाक/मुंह में बूँद द्वारा

 इस तरीके समय व कर्मचारी दोनों ज्यादा लगती है। लेकिन यह सबसे कारगर तरीका है। वैक्सीन को डेल्यूएंट में घोलिए। चिक्स को हाथ में पकड़ कर एक ड्रॉप उसकी आंखों, नाक या मुंह में एक बूंद वैक्सीन का डालिए। आंख में वैक्सीन की बूंद समा आने के बाद ही चिक्स को छोड़िए वैक्सीन को पूरे समय ठंडा ।

3  स्प्रे द्वारा

यह भी बड़ी संख्या में मुर्गियों के टीकाकरण का तरीका है एनवायरमेंटल कंट्रोल हाउस में स्त्री द्वारा टीकाकरण सबसे प्रभावी । खुले हुए मुर्गी फार्म में स्प्रे द्वारा टीकाकरण प्रभावी नहीं होता। इस पर भी द्वारा टीकाकरण के लिए वैक्सीन एयरो साल का साइज 10 यूएम से अधिक होना चाहिए 10000 से 15000 डोज के लिए 500 डिजिटल वाटर की जरूरत होती है ।वैक्सीन को डिजिटल वाटर में ही होना ।

4  मांस में या चमड़ी के नीचे सुई द्वारा 

सभी कोल्ड वैक्सीन r2b लाइव अफाउल पॉक्स लाइव वैक्सीन को सुई द्वारा मांस में या चमड़ी के नीचे लगाया जाता है। वैक्सीन से प्रभावी प्रतिरोधक क्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। वैक्सीन को नॉरमल सलाइन में घोलकर ऑटोमेटिक वैक्सीनेटर जिसमें 20 से 22 गांज की सुई लगी हो द्वारा टीकाकरण किया जाता है ।

 सावधानी

1.       टीकाकरण के लिए कुशल टेक्नीशियन या वैक्सीनेटर होना चाहिए अन्यथा यह गलत भी हो सकता ।  वैक्सीन रिएक्शन भी हो सकता ।
2.        R2B टीकाकरण के पहले मुर्गियों की डी वार्मिंग हो जाना चाहिए।हो मुर्गी का वजन 750 ग्राम से ज्यादा होना चाहिए।
3.        सही समय पर टीकाकरण होना चाहिए ।
4.       सुबह या शाम का वक्त ठीक रहता है । मौसम ठंडा हो जाता है।
5.       टीकाकरण के 24 घंटे पहले 24 घंटे बाद  कोई एंटीबायोटिक, वाटर सैनिटाइजर, डिसइनफेक्टेड ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल ना करें। जबकि एंटिस्ट्रेस बिटवीन जरूर दें। जिसमें विटामिन ए सी ई प्रमुख है।
6.        निर्देशों का पालन करें के बारे में कोई भी दो वैक्सीन एक साथ नहीं देना चाहिए ।जहां तक संभव हो अलग अलग दे और कम से कम तीन-चार दिन का अंतराल रखे। स्वस्थ मुर्गियों का ही टीकाकरण करें। वैक्सीन के बाद वैक्सीन वालों को नष्ट कर दें या जला दें।
7.        वैक्सीन पर लिखे निर्देशों का पालन करना चाहिए एवं वैक्सीन देने के तरीके के बारे में विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए वैक्सीन को हमेशा ठंडा बनाए रखें जब तक टीकाकरण ना हो ।

 ब्रायलर मुर्गियों का मेडिकेशन व टीकाकरण कार्यक्रम
 

पहले दिन – चूज़े आते ही पहले पानी में

 इलेक्ट्रॉल पाउडर –       1 ग्राम /1 लीटर पानी में                          

 पोटेशियम क्लोराइड    –    1 ग्राम /1 लीटर पानी में                                       3 दिन एक पानी में


दूसरे दिन

1.         एंटीबायोटिक 

Neodox/vendox/.                     1 ग्राम/5लीटर

Bidox -N.                                 3 दिन पूरे पानी में    

Levofloxacin/Ciprofloxacin   1  ग्राम प्रति 2 लीटर पानी में        



Colistinsulfate।                                                       तीन दिन पूरे पानी में

Azithromycin.                             100 ग्राम/1000 किलो वजन के लिए

2.       बी कॉम्प्लेक्स।                 5ml/ 100 चूजों पर

                                                                5 दिन एक पानी में

3.       AD3EC                                                    2ml / 100चूजों पर

                                                                 5 दिन एक पानी में

नोट :-  एंटीबायोटिक का डोज पूरा होने के 1 दिन बाद एक चौथाई मात्राएं avi  guard पानी में दें।

        3.    12 से 14 दिन    –    विटामिन AD3EC- 3ml/100 चूजों पर दिन में एक बार

        4.     16वे दिन।        –   Bios park/G promin 10-15ml/100पक्षियों में 5दिन एक पानी में

                                          लीवर टॉनिक।  8-10ml /100  पक्षियों पर 5 दिन एक पानी में

ब्रायलर मुर्गियों का टीककरण कार्यक्रम

पहले दिन   –       vvnd – 0.2 ml s/c प्रति चूज़ा

छटवे दिन    –        F1+ND  – एक आंख में एक बूंद/0.2mls/c प्रति चूज़ा

बरहवे दिन    –        गंबोरो प्लस – एक आंख में एक बूंद या पानी में पिलाना है।

30वे दिन       –      B1/NDVH/NDW – पानी में पिलाना है।


नोट

1.       चूजों/ मुर्गियों को विटामिन selenium (1-2 मिली लीटर प्रति 1 लीटर पानी   3ml प्रति 100 पक्षियों पर)  तनाव के समय ,बीमारी के समय एवं टीकाकरण के समय अवश्य ।

2.        समय समय पर चूजों का मुर्गियों की जांच लैब में कराएं। तथा उचित परामर्श ।
3.        हमने यह पाया है कि पानी में वैक्सीनेशन देने से स्ट्रेस पड़ता है। इसलिए पानी में वैक्सीनेशन करने के पहले खूब सोच समझ ले कि मुर्गी से झेलने के लिए तैयार है या नहीं।
4.        गर्मी में वैक्सीनेशन करते समय ध्यान रखें कि ड्रॉप मुंह में ही । और इस तरह से डालें की नाक में ना जाए केवल जीभ के नीचे डालें ताकि धीरे-धीरे गले में जाएं। और चूजे को बिल्कुल सीधे पकड़कर डालें।

फॉर्म की बायोसिक्योरिटी

1.        पक्षियों  टॉक्सिन, फंगस, रहित दाना पानी दिया जाना चाहिए। एवं समय-समय पर बीमारियों से बचाव हेतु दवाई एवम टीककरण करना चाहिए। मुख्यतः रानीखेत एवं vvndका टीकाकरण नियमित रूप से करें। इस हेतु फीनिक्स स्टाफ के तकनीकी सलाहकार से सलाह लें ।
2.       बाहरी व्यक्ति का फार्म पर प्रवेश प्रतिबंधित हो।
3.        फार्म के प्रवेश द्वार पर wheel dip/foot bath  बनाए जिसमें 5% फॉर्मलीन का घोल डालें।।
4.        डीलर की गाड़ी को शेड के पास तक ना आने दे ।उसे गेट के बाहर ही रोके बीमारी के समय ज्यादा कीटाणु इन्हीं गाड़ियों से फॉर्म पर आती है।
5.        गाड़ी जाने के पश्चात उस स्थान पर फॉर्मलीन का छिड़काव ।
6.       खाली शेडो की ट्रे को डिसिनफैक्ट करले फिर शेड के अंदर ले जाए।
7.       चुने का छिड़काव शेड के बाहर वा मुर्गियां की बीट पर बार बार करें।
8.        पानी में पोटेशियम परमैग्नेट 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में एवं ब्लीचिंग पाउडर 6 ग्राम प्रति 1000 लीटर पानी में डालकर उपयोग ।
9.        मृत पक्षियों को जमीन में गाड़ दिया जलाएं या करना नितांत आवश्यक है ।कृपया मृत पक्षियों को इधर-उधर ना फेंके।
10.    शेड में काम करने वाले कर्मचारी एक से दूसरे शेड में ना जाएं ।
11.   को ओवर क्राउडिंग होने से बचाएं ।कुत्ते बिल्ली चूहे और बाहरी पक्षियों को भी फार्म में प्रवेश करने से रोक ।
12.    बिकने के बाद लीटर को भी सेट के पास ना फेंके उसे जलवा है या फार्म से दूर के गड़वाए।
13.    फार्म की साफ-सफाई पुताई धुलाई कर 10 दिन तक खाली रखें जिससे बीमारियों का चक्र टूटने में मदद मिलेगी।

सर्दियों के मौसम में ली जाने वाली आवश्यक सावधानिया

1.        चूजों की डिलीवरी फार्म पर सुबह के समय कराएं रात को ना ।
2.        पर्दे डालकर रखें तथा सैड को खूब ब्रूडर को चूजे आने के 24 घंटे पहले चालू कर दें जिससे साइड का तापमान चूजों के अनुकूल हो।
3.       बुरादे की 3-4 इंच मोटी परत वर्म उसके ऊपर दो परत अखबार पेपर की बिछाए।
4.       चूजों को चिक बॉक्स से निकलकर इलेक्ट्रल पाउडर और पोटेशियम क्लोराइड मिला पानी पिलाकर शेड में छोड़ते जाए।
5.        पानी के बर्तन ब्रूडर के पास ही । इससे पानी भी थोड़ा गर्म  रहेगा और चूजे को ब्रूडर से दूर भी नहीं जाना पड़ेगा।
6.        2 से 3 घंटे तक पानी पीने के बाद चीजों को दो से 3 घंटे तक केवल मक्के का दलिया ही दें। उसके बाद ही प्री स्टार्टर दाना चूजों को दे।
7.        पानी तथा दाने के बर्तन उचित संख्या में ( तीन चार बर्तन 100 चूज़ों )पर

8.    ब्रूडिंग
1.   सर्दियों में चूहों की ब्रुडिंग अति महत्वपूर्ण होती है। यह उनका भविष्य तय करते हैं। कम या ज्यादा ब्रूडिंग  दोनों ही हानिकारक होते ।  होते हैं का उचित ब्रुडिंग होने से चूजों को बढ़त वा वजन दोनो अच्छे होते हैं।
2 . ब्रूडिंग का तपमान – पहला सप्ताह
ब्रुडर का तपमान     –  90°F-95°F
शेड के अंदर का तपमान-  75°F

प्रत्येक चूज़े को 2 वोट ऊर्जा मिलनी चाहिए। दूसरे सप्ताह से हर सप्ताह 5 डिग्री फारेनहाइट तापमान कम करते जाना । जब तक शेड का तापमान चूजों के अनुकूल ना हो ।

3.        ब्रूडिंग के साधन

 1.बांस की टोकरी :- बांस की टोकरी में 100 वॉट के 4 बल्ब या 200 वाट के 2 बल्ब लगाकर रखें। एक टोकरी 250 से 300 चूजों के लिए पर्याप्त है। पहले पांच-छह दिन इसकी ऊंचाई जमीन से छह से आठ इंची रखना चाहिए ।उसके बाद 7 से 10 दिन टोकरी की ऊंचाई 10 से 12 इंच रखना चाहिए 

2.गैस ब्रूडर :-गैस ब्रूडर बाजार में क्षमता के अनुसार मिलते । जितनी क्षमता के ब्रूडर है उतनी चूजों की ब्रुडिंग के लिए  लगाना चाहिए। जैसे 1000 चीजों के लिए 1000 चीजों की क्षमता का ब्रूडर गैस ब्रूडर शेड के अंदर एक समान तापमान बनाए रखता है। 
 3.गैस से सिगड़ी या भट्टी :- लकड़ी का बुरादा या कोयले को सिगड़ी में डालकर जलाएं जलने के बाद से जुड़ी या भट्टी को शेड के अंदर रखें जिस स्थान पर बिजली की समस्या है वहां गैस सिगड़ी या भट्टी से ब्रूडिंग कर सकते हैं। सीधी भट्ठी से ब्रूडिंग करने में सावधानी यह रखें कि चूज़े उस में गिरे ना एवं शेड के अंदर धुंआ ना हो वह सफोकेशन भी ना हो।

9. स्थान :- मुर्गों को पर्याप्त जगह मिलना बहुत जरूरी । अन्यथा ओवरग्राउंड व कम जगह की वजह से उन्हें अनेक बीमारियां होती हैं।मुर्गी दाना पानी के लिए भी प्रतियोगिता होती है।

 उम्र                            चूजा प्रति स्क्वेयर feet

0 से 10 दिन                             3 चूज़े/sqft

11 से 20 दिन।                         2 चूज़े/sqft

21 से 32 दिन                          1 चूजा/sqft

पांचवे सप्ताह के बाद या 1 किलो वजन के बाद प्रत्येक मुर्गी को 1.5 या 2 वर्ग फुट जगह देना चाहिए।

10.वेंटिलेशन :-अच्छा वेंटिलेशन मुर्गों की अच्छी बढ़त कराता । सैड में सीधी हवा नहीं लगनी चाहिए। खराब वेंटिलेशन अमोनिया निर्माण  करता है। तथा बुरादे को भी सूखने नहीं देता है ।सर्दियों के मौसम में वेंटिलेशन का खास ध्यान । इसके लिए मौसम के अनुसार पर्दों का प्रबंधन करें दोनों साइटों के पदों को ऊपर से एक ही आधा फुट खुला छोड़   दे। पूरे बंद ना करें ।अधिक ठंड होने पर रात के समय सेट के पदों को पूरा बंद कर सकते । शुरू के 10 दिन

11.लिटर प्रबंधन :- लिटर ताजा सूखा व फंगस वायरस परजीवी व जीवाणु मुक्त होना चाहिए। लिटर धूल रहित होना । तथा बहुत सुख एवं बहुत गिला नहीं होना । लीटर में 20 से 25% नमी हो। लिटर के ऊपर पानी नहीं गिरना चाहिए।  सप्ताह में कम से कम 2 बार लेटर की गुड़ाई करवाएं तथा उसमें एक किलोग्राम चूरा 20 वर्ग फुट जगह के हिसाब से मिलना है। ऐसा करने से लीटर सूखा बना रहेगा तथा अमोनिया निर्माण भी रुकेगा।

 गर्मियों में ली जाने वाली आवश्यक सावधानियां

1.        फार्म पर पहुंचते ही उन्हें पानी उपलब्ध कराएं जिसमे इलेक्ट्राल पावडर  पोटेशियम क्लोराइड (1ग्राम/लीटर पानी में मिला )  5 से 6 घंटे तक  यही पानी पीने के लिए दे।
2.       पानी के बर्तन उचित संख्या में लगाएं 100 चीजों के लिए तीन से चार बर्तन।
3.        5 से 6 घंटे तक पानी पीने के बाद  6 से 8 घंटे तक केवल मक्के का दलिया ही दें उसके बाद ही प्री स्टार्टर अनाजों को दें।
4.        मौसम के अनुसार ब्रूडिंग का उचित तापमान रखें दिन के समय बिल्डिंग ना करें जरूरत पड़ने पर ही बिल्डिंग करें
5.       बुरादे की मोटाई डेढ़ से 2 इंच रखें ।
6.       सैड में हवा की आवाजाही उचित । लूं चलने की स्थिति में साइड के पदों को तिरछा करके । एवं जरूरत पड़ने पर गिला । संभव हो तो छत पर स्प्रिंकलर लगाएं।
7.        पानी की जहां कमी हो वहां छत पर घास फूस डालें।
8.        ब्रायलर चूजों को बढ़ती उम्र के अनुसार उचित स्थान उपलब्ध कराएं ।गर्मी के मौसम में उत्पन्न तनाव को कम करने हेतु anti-stress विटमैंस एवं विटामिन सी देना ।
9.        बड़े पक्षियों (1 लोगकिलो ग्राम वजन के ऊपर) वाले को दिन के समय 11:00 से 5:00 बजे तक दाना ना डालें।
10.    बीमारियों से बचाव हेतु विशेषज्ञ की सलाह से ही उचित टीकाकरण एवं दवाइयों का उपयोग करें। कभी-कभी बचाव के लिए उपाय ही दूसरी समस्या पैदा कर देते हैं। कृपया हर छोटे-बड़े सुरक्षात्मक उपायों के लिए सलाह अवश्य । 
11.    पक्षियों को ओवरक्राउडिंग होने से बचाएं।

 बारिश के मौसम में ली जाने वाली आवश्यक सावधानियां

1.        फार्म पर पहुंचते ही उन्हें  निकाले इलेक्ट्रॉल पाउडर 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिला हुआ स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं। पानी में ब्लीचिंग पाउडर 1 ग्राम प्रति 1000 लीटर पानी में एवं पोटेशियम परमैग्नेट 1 ग्राम प्रति 1000 लीटर पानी में मिलाएं।
2.        5 से 6 घंटे तक पानी पीने के बाद चीजों को 6 से 8 घंटे तक केवल मक्के का दलिया ही दें। उसके बाद ही प्री स्टार्टर अनाजों को दें।
3.        पानी  के बर्तन उचित संख्या में 100 चूजों के लिए कम से कम तीन से चार बर्तन अवश्य उपलब्ध कराएं।
4.        मौसम के अनुसार शेड का उचित तापमान रखें तथा शेड का तापमान एक समान रखने वालों को पाइलिंग से ।
5.        बड़ी मुर्गियों को उचित स्थान उपलब्ध कराएं बा भीड़ भाड़ ना । सैड में हवा की आवाजाही उचित रखें। पानी की बौछार को सेट के अंदर आने से रोके। जरूरत पड़ने पर साइड के पर्दे डालकर रखें। बा बरसात रुकने पर तुरंत पर्दे ऊपर उठाएं।
6.        बुरादे की मोटाई उचित रखें 2  से 3  मोटी तथा बुरादे को गिला ना होने दें। समय-समय पर इसकी गुड़ाई करवाएं ।पानी के बर्तन के आसपास का बुरादा सूखा रखें। बारिश के मौसम में शेड के अंदर लेबर की आवाजाही कम । बा एक शेड से दूसरे शेड में आवाजाही पर रोक लगाई जाए ।
7.        बाहरी व्यक्ति का फार्म में प्रवेश प्रतिबंधित रखें।
8.        दाने के भंडारण के लिए उचित व्यवस्था कर लें।
9.        जरूरत पड़ने पर दाने में टॉक्सिन बाइंडर मिलाएं।
10.    बारिश के मौसम में होने वाली सामान्य बीमारियां जैसे कोसिडियोसिस नेक्रोटिक एंट्राइटिस brooder pneumonia  सी आर डी ई कोलाई आदि से बचाव हेतु सावधानी बरतें।
11.    समय-समय पर चूजा व मुर्गों की लैब में जांच करवाएं। तथा विशेषज्ञ से उचित परामर्श लें।




RELATED ARTICLES

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments